अयोध्या विवाद में अब सुलह-समझौते का कोई मतलब नहींः इकबाल अंसारी

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राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान को लेकर कोई भी व्यक्ति उनसे मिलने नहीं आया और न ही उनके कोई वार्ता हुई। इकबाद अंसारी ने कहा कि इससे मुझे कुछ लेना देना नहीं, न वह पक्षकार हैं और न हमारी उनसे मुलाकात हुई है
अयोध्या। राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मसले के जो लोग पक्षकार नहीं हैं वह आपस में क्या बातें करते हैं इससे मेरा कोई लेना देना नहीं है। अब इस सुलह समझौते का कोई मतलब भी नहीं है। मामला अदालत में है जो फैसला आएगा माना जाएगा।
यह बातें श्री श्री रविशंकर के प्रतिनिधियों की हाजी महबूब और मोहम्मद उमर की मुलाकात के बाद बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहीं।
श्री श्री रविशंकर के प्रतिनिधियों की बाबरी मस्जिद के पक्षकारों की वार्ता अमल में आने से पहले ही विवादों में आ गई है।
बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार इकबाल अंसारी ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों की इस मुलाकात और समझौते को लेकर चल रही वार्ता के कोई मायने नहीं हैं।
इकबाल अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि रविशंकर और हाजी महबूब से उनका कुछ लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा जिन लोगों ने सुलह-समझौते की बात की है, उनके कुछ करने से कुछ होने वाला नहीं है।
उन्होंने बताया कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान को लेकर कोई भी व्यक्ति उनसे मिलने नहीं आया और न ही उनके कोई वार्ता हुई।
इकबाल अंसारी ने कहा कि इससे मुझे कुछ लेना देना नहीं, न वह पक्षकार हैं और न हमारी उनसे मुलाकात हुई है। एक बार और जब मामला कोर्ट में हैं तो सुलह समझौते की कवायद का क्या मतलब है।
बाबरी मस्जिद के पैरोकार अकबाल अंसारी ने यहां तक कहा कि उन्होंने महंत धर्मदास को लेकर एक मुहीम चलाई है और उसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि रविशंकर का जो ग्रुप है इससे हमारा कोई नाता नहीं है, इन लोगों से वार्ता करने से मसला हल होने वाला नहीं है।
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