ऐतिहासिक फैसलाः विवादित स्थल पर ही बनेगा राम मंदिर, मुस्लिमों को अयोध्या में मिलेगी जमीन

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अयोध्या भूमि विवाद के 70 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सुन्नी वक्फ बोर्ड ने विवादित ढांचे पर अपना विशेष कब्जा साबित नहीं कर पाया। इसी के साथ ही कोर्ट ने रामलला न्यास को विवादित जमीन का अधिकार सौंप दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए निर्मोही अखाड़ा और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया। साथ ही मुस्लिम पक्ष को अलग पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया है।
पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था
फिलहाल अधिकृत जगह का कब्जा रिसीवर के पास रहेगा। पांचों जजों की सहमति से फैसला सुनाया गया है। फैसला पढ़ने के दौरान पीठ ने कहा कि ASI रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था। CJI ने कहा कि ASI ने भी पीठ के सामने विवादित जमीन पर पहले मंदिर होने के सबूत पेश किए हैं। CJI ने कहा कि हिंदू अयोध्या को राम जन्मस्थल मानते हैं। हालांकि, ASI यह नहीं बता पाया कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाई गई थी।
सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव
इसके अलावा मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि वहां दोनों ही पक्ष पूजा करते थे। रंजन गोगोई ने कहा कि ASI की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी। साथ ही सबूत पेश किए हैं कि हिंदू बाहरी आहते में पूजा करते थे। साथ ही CJI ने कहा कि सूट -5 इतिहास के आधार पर है जिसमें यात्रा का विवरण है। सूट 5 में सीता रसोई और सिंह द्वार का जिक्र है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है। CJI ने कहा कि 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिंदुओ पर कोई रोक नहीं थी। मुसलमानों का बाहरी आहते पर अधिकार नहीं रहा।
फैसले की बड़ी बातें
-अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मंदिर का रास्ता साफ
-विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को मिलेगी
-सुन्नी वक्फ को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन मिलेगी
-निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज
-पक्षकार गोपाल विशारद को मिला पूजा-पाठ का अधिकार
-तीन महीने में केंद्र सरकार करेगी मंदिर ट्रस्ट का गठन
-राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार करेगा नया ट्रस्ट
-मुस्लिम पक्ष को जमीन देने की जिम्मेदारी योगी सरकार की
-आस्था और विश्वास पर नहीं, कानून के आधार पर फैसला
-मुस्लिम के पास जमीन को कोई विशेष कब्जा नहीं था
-अंग्रेजों के जमाने तक वहां पर नमाज के सबूत नहीं
-मुस्लिमों को वैकल्पिक जमीन देने का आदेश
-राम लला का दावा बरकरार,
-अयोध्या में ही पांच एकड़ की जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए
-यहां पर वह अपनी मस्जिद बना सकती है
-संविधान की धारा 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट का फैसला, गोपाल विशारद की याचिका को सही माना
-राम जन्मभूमि न्यास को विवादित जमीन दिया गया सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
-अब यहां पर मंदिर बनाने की तैयारी की जा सकती है
-संविधान पीठ ने कहा कि इस बात पर फैसला आस्था के आधार पर नहीं
-आस्था के आधार पर जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता
-मुस्लिम पक्ष जमीन पर दावा करने में नाकाम रहा है
-कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं की आस्था पर कोई विवाद नहीं
-खुदाई में जो मिला था वो इस्लामिक ढांचा नहीं है
-खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी बाबरी मस्जिद
-सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा खारिज किया
-अयोध्या पर शिया बोर्ड की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए मुसलमान
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 1885 से पहले हिन्दू अंदर पूजा नहीं करते थे. बाहरी अहाता में रामचबूतरा सीता रसोई में पूजा करते थे। 1934 में दंगे हुए, उसके बाद से मुसलमानों का एक्सक्लूसिव अधिकार आंतरिक अहाते में नहीं रहा। मुसलमान उसके बाद से अपना एकाधिकार सिद्ध नहीं कर पाए। हिन्दू निर्विवाद रूप से बाहर पूजा करते रहे। 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद का ढांचा ढहा दिया गया।
इस संवैधानिक पीठ ने सुनाया फैसला
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाया। इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर ने फैसला सुनाया। खास बात है कि यह फैसला पांचों जजों की सर्वसम्मति से सुनाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं, लेकिन संतुष्‍ट नहींः मुस्लिम पक्ष
अयोध्‍या केस में सीजेआई रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने फैसले में कहा कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। साथ ही उन्‍होंने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अयोध्‍या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने का फैसला दिया। इस पर सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने असंतुष्टि जताई। उन्‍होंने कहा, ‘हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्‍मान करते हैं। लेकिन हम इससे संतुष्‍ट नहीं है। इसे लेकर आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे। जफरयाब जिलानी ने कहा कि अगर हमारी कमेटी सहमत होगी तो हम इस पर पुनिर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।
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