‘विश्व स्तनपान सप्ताह’: भारत में पांच में से तीन नवजात स्तनपान से वंचित

0
33
‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ की शुरुआत करते हुए अपर मिशन निदेशक श्रुति ने कहा, जन्म के पहले घंटे के भीतर शिशु को मां का दूध पिलाने से न केवल शिशु को गम्भीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है बल्कि शिशु मृत्यु की सम्भावना भी 33 प्रतिशत कम हो जाती है। मां का पहला दूध बच्चे के लिए वैक्सीन की तरह होता है जो बच्चे में गम्भीर रोगों से लड़ने की क्षमता पैदा करता है। यह जानकारी अपर मिशन निदेशक श्रुति ने राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन उप्र के विशाल काम्प्लेक्स स्थित सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में दी।
शिशुओं को मां के दूध की आवश्यकता पर हो रही चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि अस्पतालों में होने वाले प्रसव उपरान्त मां अपने बच्चे को दूध पिलाये इसके लिए अस्पताल के कर्मचारियों, आशाओं को भी विशेष निर्देश दिए गए है। केजीएमयू में ‘मदर मिल्क बैंक’ बनाने की तैयारी भी चल रही है।
उन्होंने बताया कि विश्व में जन्म के एक घन्टे के भीतर पांच में से तीन नवजात स्तनपान से वंचित रहते हैं। मां का दूध शिशु के व्यापक विकास, मानसिक विकास, शिशु को डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाने और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। विश्व भर में जन्म के एक घन्टे के भीतर पांच में से तीन नवजात शिशु स्तनपान से वंचित रहे जाते हैं। इन नवजात शिशुओं में मृत्यु का अधिक खतरा होता है एवं आगे भी इन शिशुओं में स्तनपान जारी रखने की सम्भावना कम रहती है।
80294341_wide
अपर मिशन निदेशक ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा सामुदायिक एवं चिकित्सीय इकाई दोनो स्तरों पर स्तनपान के व्यवहार को बढ़ावा देने एवं नवजात शिशु मृत्युदर कम करने के उद्देश्य से ‘मां’-‘मां’ का पूरा प्यार कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
महाप्रबन्धक बाल स्वास्थ्य डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि प्रदेश सरकार शिशुओं को जन्म के तुरन्त बाद स्तनपान शुरू कराने पर बल दे रही है। सभी चिकित्सकों एवं स्टाफ नर्सो को इसके लिए सेंसिटाइज किया गया है कि चिकित्सालय में जन्में प्रत्येक नवजात शिशु सभी सामाजिक रूढ़ियां तोड़कर जन्म के एक घण्टे के भीतर स्तनपान कराया जाये। उत्तर प्रदेश में केवल 25.2 प्रतिशत नवजात शिशुओं को जन्म के एक घन्टे भीतर स्तनपान कराया जाता है।
उन्होंने बताया कि नेशनल फैमली हेल्थ सर्वे एनएफएचएस-4 2015—16 के अनुसार (गोण्डा 13 प्रतिशत, मेरठ 14.3 प्रतिशत, बिजनौर 14.7 प्रतिशत, हाथरस 15.3 प्रतिशत, एवं सहारनपुर 15.8 प्रतिशत) प्रदेश में स्तनपान शुरू करने की प्रक्रिया में सबसे निम्न स्तर पर है। बुन्देलखण्ड के तीन जनपद महोबा 42.1 प्रतिशत, बांदा 41 प्रतिशत, एवं ललितपुर 40 प्रतिशत अन्य जनपदों की तुलना में बेहतर है।
जिन नवजात शिशुओं को जन्म के एक घन्टे के भीतर स्तनपान कराया जाता है उनमें मृत्यु की सम्भावना कम होती है जन्म के बाद कुछ घन्टों की देरी या नवजात की जान के लिये खतरा बन सकती है। शिशु का माता की त्वचा से सम्पर्क एवं स्तनपान माता में स्तनपान प्रक्रिया में दूध बनने की प्रक्रिया की बढ़ाता है। प्रथम स्तनपान अथवा कोलोस्ट्रम जिसे प्रथम टीकाकरण भी कहते हैं, पोषण तत्वों से भरपूर होता है तथा शिशु की संक्रमण से रक्षा कराता है।
डॉ. वेद प्रकाश, महाप्रबन्धक, बाल स्वास्थ्य द्वारा अवगत कराया गया कि स्तनपान केवल माता की ही जिम्मेदारी नहीं है। परिवार समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा नियोक्ता को एक साथ मिलकर इसमें सहयोग देने की आवश्यकता है। जिससे स्तनपान सप्ताह की इस वर्ष की विश्व थीम को केन्द्रित करते हुए इस पर अमल किया जा सके। इस विषय पर कार्यशाला में एक प्रजेन्टेशन प्रस्तुत कर शिशुओं को स्तनपान से लाभ एवं न कराने से हानियों पर विस्तार से जानकारी भी दी गई।
loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here