मुंबई की सड़कों पर दलित प्रदर्शनकारियों का तांडव, बसों को जलाया, ट्रेनों का चक्का जाम किया

0
7116

मुंबई। महाराष्ट्र के पुणे में कोरेगांव में भड़की हिंसा की लपटें मुंबई तक पहुंच गई हैं। आठ दलित संगठनों ने महाराष्ट्र बंद का ऐलान करते हुए सरकार से मांग की है कि इस घटना का जांच सीटिंग जज से कराई जाए। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि जांज करने वाले जज को पर्याप्त अधिकार प्रदान किए जाएं जिससे दोषी पर कड़ी कार्रवाई करने में किसी प्रकार का संकोच न हो तथा जो भी जज जांच करे वह गैर दलित हो।

दरअसल दलित समुदाय के लोग एक जनवरी को कोरेगांव युद्ध की 200 वीं बरसी मनाने पहुंचे थे। एक जनवरी 1818 को आठ सौ महारों ने 28 हजार पेशवा सैनिकों को हरा दिया था। इसी का शौर्य दिवस मनाने तकरीबन पांच लाख लोग कोरेगांव पहुंचे थे कि न पर पत्थरबाजी कर दी गई। इसके बाद हिंसा भड़क गई जिसकी लपट मुंबई तक पहुंच गई और आज मुंबई बंद के दौरान जगह-जगह प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सड़क पर विरोध, प्रदर्शनकारियों ने रोकी बसें और पहियों से हवा निकाल दी।

मुंबई समेत महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों से भी दलितों के विरोध प्रदर्शन की खबरें आ रहीं हैं। ठाणे के शास्त्री रोड पर प्रदर्शनकारियों ने बस और ऑटो रिक्शा रोक दी। ट्रैफिक रोकने के लिए प्रदर्शनकारियों ने बसों की हवा भी निकाल दी।


औरंगाबाद में इंटरनेट सेवा ठप्प

जातीय हिंसा के बाद फैले तनाव को देखते हुए औरंगाबाद में इंटरनेट सेवा रोक दी गई है. बता दें कि मंगलवार को औरंगाबाद जिले में दलितों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट सेवा रोकने का फैसला लिया है।

तनाव को देखते हुए ठाणे के कई स्कूल बंदः ठाणे जिला प्रशासन ने जातीय हिंसा के बाद फैले तनाव को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है।


सड़कों पर याताया सेवा बाधित, पब्लिक परेशान
तनाव को देखते हुए ठाणे में धारा 144 लागू की गई है। हालातों का असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी पड़ा है। कई जगहों पर लोग बसों और ऑटो का इंतजार करते नजर आए। पुणे के बारामती से सतारा जाने वाली बस सेवा को भी रोक दिया गया है। एक राहगीर ने बताया, ‘आज सड़कों पर ऑटो-रिक्शा और बसें बहुत कम हैं. इसका असर पूरे राज्य में है। खास तौर पर ऑफिस जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।’

डब्बेवालों की डिलिवरी आज बंद

मुंबई में तनाव की स्थिति को देखते हुए डब्बावाला आज टिफिन डिलिवरी नहीं करेंगे। मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन के नेता सुभाष तालेकर ने कहा है कि एसोसिएशन ने तनाव को देखते हुए आज टिफिन डिलिवरी न करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि आज आने-जाने में और वक्त पर टिफिन डिलिवरी करने में परेशानी हो सकती है इसी को देखते हुए एसोसिएशन ने यह फैसला लिया है।

अफवाहों पर न दें ध्यान- मुंबई पुलिस

मुंबई पुलिस ने भीमा-कोरेगांव हिंसा को लेकर फैले तनाव को देखते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस ने अपील में कहा है, ‘लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, अपने रोजमर्रा के कामों को जारी रखें। पुलिस प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

मुंबई में संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती

मुंबई के घाटकोपर इलाके के रमाबाई कॉलोनी और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पर मुंबई पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है।

मुंबई में आज नहीं दौड़ेंगी स्कूल बसें

भीमा-कोरेगांव हिंसा का असर मुंबई पर भी पड़ा है. दलित संगठनों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए स्कूल बस एसोसिएशन ने बुधवार को बसों को न चलाने का फैसला किया है। एसोसिएशन के नेता अनिल गर्ग ने कहा, ‘हालातों को देखते हुए हम मुंबई में आज स्कूल बसें नहीं चलाएंगे, हम बच्चों की सुरक्षा पर रिस्क नहीं ले सकते। दूसरा निर्णय हम 11 बजे लेंगे। अगर हालात ठीक रहे तो सेकेंड हाफ में हम बसों को चला सकते हैं।

महाराष्ट्र के ठाणे में धारा 144 लागू

भीमा-कोरेगांव युद्ध की 200वीं बरसी पर भड़की हिंसा को देखते हुए महाराष्ट्र के ठाणे में धारा 144 लगा दी गई है, जोकि 4 जनवरी की मध्यरात्रि तक लागू रहेगी। कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

ठाणे रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने रोकी ट्रेन

क्या है भीमा कोरेगांव का इतिहास?

भीमा-कोरेगांव की लड़ाई इतिहास के पन्नों में दर्ज है। दरअसल, इतिहास में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई का जिक्र है, जोकि 1 जनवरी 1818 को पुणे के कोरेगांव में भीमा नदी के पास हुई थी। यह लड़ाई महार (दलित) और पेशवा सैनिकों के बीच लड़ी गई थी. ब्रिटिश सेना में महार सैनिक थे, जिन्होंने पेशवाओं की सेना को हरा दिया था।

महार सैनिकों की इसी जीत का जश्न मनाने के लिए हर साल महाराष्ट्र और अन्य जगहों से हजारों की संख्या में दलित पहुंचते हैं। बीती 1 जनवरी को भी दलित समुदाय के लोग भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक पर शौर्य दिवस मनाने पहुंचे थे।

loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here