यौन अपराध के बाद ‘समझौता’ कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए अदालत ने क्या कहा

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यौन अपराधों को लेकर समाज का एक बड़ा तबका बेहद संकीर्ण मानसिकता रखता है। इस तबके के अधिकांश लोग इस आचरण में विश्वास रखते हैं कि यौन अपराध करो और समझौता कर लो। यौन शोषण की पीड़िता उस वक्त किस पीड़ा से गुजरती है इस बात से बे फिक्र उसके स्वाभिमान को कुचलने में देर नहीं लगाते हैं। उनके इस कुकृत्य में समाज के कुछ संभ्रांत लोग भी शामिल हो जाते हैं यह कहते हुए कि इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा बच जाएगी और जीवन सुधर जाएगा। लेकिन जिसके साथ ऐसा अपराध होता वह इस पीड़ा को लेकर पूरा जीवन गुजारने के लिए अभिशप्त हो जाती है। ऐसे ही यौन अपराध को लेकर प्रयागराज हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
यौन अपराध जैसे मामलों में समझौते की गुंजाइश नहीं
यौग अपराध के बाद समझौते की इस परिपाटी पर प्रयागराज हाईकोर्ट ने कहा, यौन अपराध सभ्य समाज के मानकों के विपरीत आचरण है। यह समाज के विरुद्ध आचरण है, इसलिए इसे समझौते के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, यौन अपराध नारी की निजता और शुद्धता के अधिकार के विरुद्ध है, इसलिए ऐसे अपराध में कानूनी तौर पर समझौते की गुंजाइश नहीं है।
दहेज की मांग पूरी न होने पर किया दुष्कर्म
हाईकोर्ट ने कहा, शादी की पहली राज में दहेज की मांग पूरी न होने पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया। ऐसे आरोपी को समझौते के आधार पर छोड़ देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। ऐसे मामले को रद्द नहीं किया जा सकता । अदालत ने कहा, यदि ऐसे समाज के विरुद्ध अपराधों में समझौते की अनुमति दी गई तो धनाढ्य और शक्तिशाली लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोरों पर दबाव डाल कर अपराध को समझौते से खत्म करा लेंगे।
क्या है मामला
छह मार्च 19 को याची की पीड़िता के साथ शादी हुई। शादी में सात लाख खर्च हुए। विदाई से पहले ही ससुराल वालों ने 50 हजार नकद की मांग की। किसी तरह विदाई हुई। पहली रात में पति के जीजा दाऊद ने पीड़िता से दुष्कर्म किया। फिर पति ने भी दुष्कर्म किया। पीड़िता की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया। सास पर भी गला दबाकर मारने का आरोप है। ससुर पर दहेज उत्पीड़न का आरोप है।
याची ने की थी समझौते की बात
पीड़िता के बयान पर उसके भाई ने ससुराल वालों पर प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया जिस पर कोर्ट ने संज्ञान भी ले लिया। इसके बाद याचिका दाखिल कर कहा गया कि उनके बीच समझौता हो गया है, दोनों पति-पत्नी की तरह से रह रहे हैं। इसलिए एसीजेएम की अदालत में चल रहे केस को रद्द किया जाए। कोर्ट ने इसे मानने से इंकार कर दिया है।
अदालत ने किया इनकार
मुजफ्फरनगर के कलील और उनके चार अन्य पारिवारिक सदस्यों की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने समझौते के आधार पर मुकदमा समाप्त करने की मांग नामंजूर कर दिया।
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