यकीन करना मुश्किल है, यूपी में ऐसा भी हो सकता है, जानिए क्या है हकीकत

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उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने यूपी में लगातार बढ़ रहे अपराध और अपराधियों को चेतावनी जारी कर दी थी। उनकी चेतावनी का असर भी दिखा पुलिस की सक्रियता बढ़ी एनकाउंटर की संख्या भी बढ़ी, बड़ी संख्या में अपराधी मारे गए, वाबजूद इसके यूपी में अपराध कम नहीं हो रहा है। इन सब के बीच यूपी से एक ऐसा खबर है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या यूपी में ऐसा भी हो सकता है, आप यकीन नहीं कर पाएंगे लेकिन ये सच है।
पुलिस महकमा भी हैरान, आखिर ऐसा कैसे हो सकता है
अपराधियों का गढ़ कहा जाने वाला एटा, जहां अपराध खूब फलता-फूलता है, वहां से चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां पर एक थाना ऐसा है जहां पर 19 सालों में मात्र दो एफआईआर दर्ज की गई है। इस थाने में 16 साल तक कोई शिकायत पंजीकृत नहीं कराई गयी। अपराधग्रस्त इलाके में अपराध की इतनी कम संख्या पुलिस महकमे से लेकर आम नागरिकों को हैरान कर रही है। महकमा हैरान है कि आखिर इतनी कम एफआईआर और इस इलाके में असंभव…लेकिन यह बिल्कुल सच है, इस बात का दावा एटा जीआरपी का थाना कर रहा है। उनका कहना है कि यहां माहौल पूरी तरह से शांतिप्रिय।
2016 तक जीडी पूरी तरह खाली पड़ी रही
बतादें, रेलवे कॉलोनी स्थित जीआरपी थाने की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। इससे पहले एटा जिले में जीआरपी की चौकी ही थी। एटा से टूंडला तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी पहले चार सिपाहियों के जिम्मे थी, लेकिन जब से थाने की स्थापना हुई तो एक प्रभारी, एक हेड कांस्टेबल सहित आठ जवानों की ड्यूटी लगाई गई। थाने का संचालन होने के बाद से वर्ष 2016 तक थाने में रखी जीडी पूरी तरह से खाली पड़ी रही।
19 साल में महज दो एफआईआर
इस थाने में पहली एफआईआर वर्ष 2016 में लिखी गई, जब ट्रेन की बोगी में एक शव मिला था, इसके बाद वर्ष 2019 में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई, अराजक तत्वों ने गेटमैन से मारपीट की थी। गौरतलब है कि एटा उत्तर प्रदेश के अपराधग्रस्त जिलों की सूची में शामिल है, ऐसे इलाके में एफआईआर दर्ज न होना इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि एटा को अपराधग्रस्त बताने के सारे दावे खोखले हैं।
यहां ट्रेन में लूट या चोरी की वारदात नहीं हुई
जीआरपी थाना की पुलिस एटा और आगरा बॉर्डर की अंतिम स्टेशन बरहन तक निगरानी करती है। एटा जिले की शाह नगर टिमरूआ स्टेशन अंतिम स्टेशन है। जीआरपी के दो सिपाही ट्रेन के साथ जाते हैं जो ट्रेन ले जाने और लाने का काम करते हैं। थाने की स्थापना होने के बाद से ट्रेन में अब तक किसी भी तरह की लूट या चोरी की वारदात नहीं हुई है।
अपराध ही नहीं हो रहा है तो मुकदमा कैसे लिखा जाएगा

थाना प्रभारी विक्रम सिंह

एटा के इस थाने में अपराध के रिकार्ड न के बराबर होने को लेकर थाना प्रभारी प्रताप सिंह का कहना है कि, जब से यह थाना बना है 19 साल हो गए महज दो ही एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने कहा यहां अपराध न के बराबर है, जब अपराध ही नहीं होगा तो मुकदमा कैसे लिखा जाएगा।
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