10 घंटे बाद पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन खत्म, सभी मांगें मानी गईं, केन्द्र नाराज

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दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में एक मामली बात ने हिंसक रूप ले लिया और कानून के रखवाले आमने सामने आ गए। वकीलों मे पुलिस वालों को पीटा तो पुलिसकर्मियों ने भी वकीलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पूरे 10 घंटे दिल्ली पुलिस के जवान अपनी मांग पर अड़े रहे और अब पुलिसकर्मियों के विरोध के 10 घंटे के बाद उनकी सभी मांगों को मान लिया गया और पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया है।
उधर दिल्ली में मंगलवार को पुलिस ने जिस तरीके से सेवा आचरण का उल्लंघन करते हुए प्रदर्शन किया उससे केंद्र नाराज हो गया है। वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प के बाद पुलिस के विरोध के मद्देनजर केंद्र सरकार का यह मानना है कि दिल्ली पुलिस का नेतृत्व इस स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहा, जिससे लोगों में लॉ एंड ऑर्डर की छवि को नुकसान पहुंचा है। दिल्ली पुलिस के 6 वरिष्ठ अफसरों ने प्रदर्शन खत्म करने की अपील की थी लेकिन पुलिसवालों ने उनकी नहीं सुनी।
अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस के शीर्ष स्तर पर बहुत जल्द बदलाव हो सकता है।अधिकारी के मुताबिक, पुलिस की वास्तविक शिकायत हो सकती है, लेकिन उन्हें उचित माध्यम से इस मुद्दे को उठाना चाहिए था। हम एक अनुशासित बल को भीड़ की मानिसकता विकसित करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिसकर्मियों की सभी मांगे मान ली गई हैं। अब इस पूरे प्रकरण में न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के बाद ही कोई कार्रवाई की जाएगी। जांच के बिना पुलिसकर्मियों पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जाएगी। आरोपी पुलिसकर्मियों के निलंबन पर भी रोक लग गई है। वहीं साकेत कोर्ट में आरोपी वकीलों की गिरफ्तारी होगी।
इसके अलावा घायल पुलिसकर्मियों को 25 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर भी दिया जाएगा। वहीं वकीलों की गिरफ्तारी पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा लगाई रोक के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की है जिसपर बुधवार दोपहर 3 बजे सुनवाई होगी। इससे पहले गृह मंत्रालय ने वकीलों की गिरफ्तारी न करने के आदेश पर पर हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा था।
मुख्यालय के बाहर सैकड़ों की संख्या में जवान जुटे और ‘काला कोट हाय-हाय’ के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान कई बार पुलिस कमिश्नर ने जवानों से प्रदर्शन वापस लेने के लिए कहा लेकिन जवानों ने इसे मानने से इंकार कर दिया। इस मामले में गृह मंत्रालय ने दिल्ली हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्रालय ने हाईकोर्ट से ‘वकीलों पर कार्रवाई न करने’ के आदेश पर सफाई देने के लिए कहा है।
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