PMC बैंक घोटालाः अभी और कितने लोगों की लेगा जान, अब तक हो चुकी हैं पांच मौतें…

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पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक(PMC) में एक दशक से चल रहे फर्जी वाड़े का खामियाजा आखिरकार यहां के खाता धारकों को भुगतना पड़ा रहा। इस एक दशक में पीएमसी बैंक में 6500 करोड़ रुपए के लोन घोटाले को अंजाम दिया गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है बैंक के घोटालों की परतें खुलती जा रही हैं। इन सब के बीच पीएमसी बैंक के खाताधारकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। छह माह में केवल 40 हजार रुपए निकालने के आरबीआई के फरमान के बाद खाताधारकों पर मुश्किलों को पहाड़ टूट पड़ा है। इन मुश्किलों के चलते अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है।
अब तक चार की मौत…
पीएमसी बैंक घोटाले के बाद बीते कुछ ही दनों में उसके तीन खाताधारकों की मौत की खबर सामने आई हैं। फट्टोमल पंजाबी, संजय गुलाटी की हार्टअटैक से मौत हो गई तो एक 39 वर्षीय डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली है। शुक्रवार को पीएमसी बैंक से एक और व्यक्ति की मौत हो गई। कारण बताया गया कि इस 83 वर्षीय बुजुर्ग को समय से पैसे नहीं मिले इसलिए इलाज के अभाव में उनका मौत हो गई।
पांचवे खाताधारक की मौत
इस बीच एक और मौत की खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के मुलुंद निवासी बुजुर्ग राम अरोड़ा का खाता पीएमसी बैंक में है। उनकी शनिवार को घर पर मौत हो गई, हालांकि उनके परिजनों का कहना है कि यह प्राकृतिक मौत है और इसका बैंक घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। राम अरोड़ा बैंक में जमा पैसों पर निर्भर नहीं थे। इससे पहले चार लोगों की मौत हो चुकी है जिसमें तीन ने बीमारी के दौरान इलाज के लिए पैसे नहीं निकाल पाने के कारण दम तोड़ा और एक महिला ने खुदकुशी कर ली थी।
पैसे की कमी से नहीं हो पाया इलाज और मौत हो गई
जानकारी के मुताबिक पीएमसी बैंक के खाताधारक मुरलीधर ढर्रा काफी समय से बीमार थे और वह इलाज पर ही अपनी बची जिंदगी गुजार रहे थे। इधर बीच जब से आरबीआई ने पीएमसी बैंक के खातों को सीज कर दिया और पैसे निकलाने की सीमा तय कर दी उनके इलाज में दिक्कते सामने आने लगीं। शुक्रवार को पैसे की कमी से इलाज न मिल पाने के कारण उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मुरलीधर ढर्रा के खाते में 80 लाख रुपए जमा थे, इन्ही पैसों से उनकी हार्ट सर्जरी होनी थी।
तीन बार बदली गई कैश निकासी की सीमा
आरबीआई ने बीते 24 सितंबर को नोटिस जारी कर पीएमसी बैंक पर छह माह तक लेनदेन पर प्रतिबंध लगा दिया था। नोटिस के मुताबिक बैंक न तो नया लोन जारी कर सकता है और न ही कोई ग्राहक 25 हजार से ज्याद की निकासी कर सकता था। इसके पहले रिजर्व बैंक ने तीन अक्टूबर को कैश निकालने की सीमा 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी थी। लेकिन बाद में निकासी की सीमा बढ़ाकर 40 हजार कर दी गई।
क्या है पीएमसी बैंक घोटाला
पंजाब व महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में लोन के नाम पर घोटाला लगभग एक दशक से चल रहा था। जांचकर्ता अधिकारियों की माने तो जॉय थॉमस की अगुआई में बैंक मैनेजमेंट ने कंस्ट्रक्शन कंपनी HDIL को फंड दिलाने के लिए हजारों डमी अकाउंट खोले हुए थे। रेगुलेटर को शुरुआत में पता चला कि थॉमस और मैनेजमेंट के कुछ लोगों ने मिलकर 4,226 करोड़ रुपये (बैंक के टोटल लोन का 73% हिस्सा) सिर्फ एक ही कंपनी HDIL को दिए थे, जो अब दिवालिया हो गई है।
4226 करोड़ का नहीं 6500 करोड़ रुपए का है पीएमसी लोन घोटाला
बैंक के इस कार्यप्रणाली से बैंक दिवालिया होने के कगार पर आ गया। बैंक की इस हरकत को संज्ञान में लेते हुए आरबीआई ने इसके सभी कामकाज पर रोक लगा दी। आरबीआई ने यहां के खाताधारकों के पैसे निकासी की सीमा तय कर दी। इसके बाद जांच एजेंसियों के सामने वो बात सामने आई जिसे बैंक काफी दिनों से छुपाए रखा था। जांच में पता चला कि जिसे घोटाले को 4226 करोड़ का बताया जा रहा वह 6500 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है घोटालों की परत खुलती जा रही है।
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