आम्रपाली ग्रुप का फर्जीवाड़ाः फंस सकते हैं धोनी, सुप्रीम कोर्ट ने लिया साक्षी का नाम

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टीम इंडिया के फिनिसर के नाम से पहचाने जाने वाले महेन्द्र सिंह धोनी एक बार मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने उनकी तरफ उंगली उठाई है। दरअसल आम्रपाली ग्रुप के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने धोनी की पत्नी साक्षी का नाम लिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में आम्रपाली ग्रुप की डाटरेक्ट साक्षी को शामिल करते हुए कहा कि कंपनियों ने पैसा इधर-उधर करने का फर्जीवाड़ा किया है। कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप की कंपनी आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट पर भी कोर्ट ने सवाल खड़े किए हैं।
कोर्ट ने 270 पेज के अपने फैसले में फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र किया है। कोर्ट के फैसले के पेज नंबर 85 पर लिखा है कि कंपनी ने तमाम शेयर कैपिटल और खर्च आदि कैश में किए हैं। महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी सिंह धोनी इस कंपनी की डायरेक्टर थीं और महेंद्र सिंह धोनी कंपनी के प्रमोटर। इस कंपनी के द्वारा आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए काफी पैसों का लेन-देन हुआ है।
उन्होंने दूसरी कंपनियों के साथ भी अग्रीमेंट किया। कोर्ट के फैसले में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी कंपनी की डायरेक्टर थीं और उनके पास कंपनी के 25 फीसदी शेयर थे। जबकि कंपनी के 75 फीसदी शेयर आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल कुमार शर्मा के पास थे।
फॉरेंसिक टीम की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार घर खरीदने के नाम से खरीददारों से 5619 करोड़ रुपए लिए गए जिसे आम्रपाली ग्रुप की इन कंपनियों में भेजा गया। आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी काफी पैसा कैश के तौर पर हासिल किया है।
इस कंपनी की शुरुआत दिसंबर 2011 में हुई थी और इसके कामकाज के बारे में कुछ जानकारी नहीं दी गई थी। कंपनी के वर्ष 12, 13, 14 के वित्तीय मुनाफे की भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि हम मुजबानी यह बताया गया कि इस कंपनी की शुरुआत रांची में एक प्रोजेक्ट के लिए गई थी, इसके लिए दो पार्टियों के बीच एमओयू भी साइन हुआ था, लेकिन इसके दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए हैं।
गौरतलब है कि आम्रपाली ग्रुप के फर्जीवाड़े में धोनी का नाम आया, उसके बाद धोनी ने अपने आप को इस कंपनी से अलग कर लिया। तीन साल बाद धोनी ने कंपनी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और मानहानि के तौर पर 40 करोड़ रुपए की मांग की। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि शुरुआती तौर पर लगता है कि फेमा के नियमों का उल्लंघन किया गया है, मनी लॉड्रिंग की गई है।
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